The man who did it -2 (Hn)

This is a real story of an anonymous person. Hindi translation has been done from the original English message by the writer.

१.)आप भारत के किस भाग से ताल्लुकात रखते हैं ?
– दक्षिण भारत |

२.)जीवन यापन हेतु आप क्या करते हैं?
– मैं एक व्यवसायी हूँ |

३.)पढ़ने या कार्य के दौरान क्या आपको किसी प्रकार की परेशानी होती है ?
– हाँ काफी ज़्यादा किन्तु इसपे नियंत्रण की कोशिश ज़ारी है |

४.) जैसा कि आपको ocd की समस्या थी तो प्रथम बार आपको इसकी जानकारी कैसे प्राप्त हुई ?
-हाल ही में एक मनोचिकित्सक द्वारा किए जाँच के पश्चात मुझे पता चला कि जिस बीमारी से मैं जूझ रहा हूँ उसका नाम OCD है | एक वर्ष पूर्व ocd काफ़ी ज़्यादा बढ़ गयी हालाँकि इसे मैं 14 वर्ष के किशोरावस्था से ही झेल रहा हूँ | वर्तमान में मेरी आयु 37 वर्ष है |

५.)क्या वर्तमान में आपका इलाज जारी है ?
-हाँ मैं रोज़ाना दवाई लेता हूँ और इसके अलावा स्वयं से इस परिस्थिति से बाहर आने की हर तरकीब आज़मा रहा हूँ | जल्द ही CBT या ERP लेने की इच्छा है |

६.)अभी ocd कितनी मात्रा में होगी (लगभग) ?
– अगर एक साल पहले से तुलना की जाए जब मेरी अवस्था काफ़ी ख़राब थी , वर्तमान में लगभग 30 प्रतिशत शेष रह गया है |

७.) बीमारी की बात करें तो क्या आप हमारे पाठकों को बताना चाहेंगे कि किन प्रकार के विचार आपको सर्वाधिक परेशान करते हैं/ थे ?
-अनैच्छिक , अवास्तविक, अवांछनीय विचार मेरे मन में आते रहते हैं जिससे कि काफी ज़्यादा बेचैनी होती है | मैं सार्वजनिक स्तर पर मेरे विचारों को व्यक्त तो नहीं कर सकता लेकिन गोपनीय रूप से अगर कोई जानना चाहे तो बता पाउँगा |

८.) आपका सन्देश उन लोगों के लिए क्या रहेगा जो अभी भी ocd के चुंगल से बाहर नहीं आ पाए हैं ?
– ऐसे लोगों की मात्रा काफ़ी ज़्यादा है जिन्हे यह यह भी नहीं पता कि यह एक recognised medical condition है… ऐसे लोगो तक तो मैं मेरी आवाज़ नहीं पहुंचा सकता लेकिन वैसे लोग जो ऑनलाइन active रहते हैं ( चाहे social media या medical related websites पर) मेरा संदेश उनके लिए यही है कि ना सिर्फ़ ocd का इलाज़ संभव है बल्कि इससे पूर्ण रूप से मुक्ति भी पायी जा सकती है बस हमें सही वक़्त का इंतज़ार करना होगा |

९.) आपके अनुसार Ocd के रोकथाम में सरकार की क्या भूमिका को सकती है ?
– कई ऐसे लोग भी हैं जो काफ़ी ज्यादा पढ़े लिखे हैं लेकिन उनको इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं कि उन्हें ocd है और मैं इन्हीं लोगो की गिनती मे शामिल हूँ |
सरकार से मैं आशा रखता हूँ कि समय समय पर भारत के हर कोने में चाहे वो महानगर , शहर , जिला या गांव हो ocd से जुड़ी जागरूकता अभियान आयोजित हो और नारे जैसे “DONT SUFFER SILENTLY” ” अगर आप अवसाद, बेचैनी , असहजता,अनैच्छिक विचारो से पीड़ित हैं तो अपना इलाज करवाने में हिचकिचाए नहीं, इलाज मौजूद है, आप अकेले नहीं हैं ” पर बल देना चाहिए | जरुरतमंदो ( जो आर्थिक रूप से असमर्थ हैं )को इलाज़ मुफ़्त में देने के बारे में सोचना चाहिए |